TET For Primary Teachers Good News: इन सभी शिक्षकों के लिए टेट जरूरी नहीं, जानें पूरा नियम

TET For Primary Teachers Good News: शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे लाखों उम्मीदवारों के बीच लंबे समय से एक बड़ा सवाल बना हुआ था—क्या हर शिक्षक के लिए टीईटी (TET) पास करना अनिवार्य है या कुछ मामलों में इससे छूट भी मिल सकती है? खासकर वे अभ्यर्थी, जिनकी भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2010 से पहले शुरू हुई थी, उनके लिए यह मुद्दा काफी महत्वपूर्ण था। अब इस पूरे मामले पर स्थिति काफी हद तक साफ हो चुकी है।

23 अगस्त 2010 का नियम क्यों है अहम?

राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) ने 23 अगस्त 2010 को एक महत्वपूर्ण नियम लागू किया था। इस नियम के तहत कक्षा 1 से 5 तक पढ़ाने के लिए डीएलएड (D.El.Ed) और कक्षा 6 से 8 तक के लिए बीएड (B.Ed) अनिवार्य किया गया। इसके साथ ही टीईटी (Teacher Eligibility Test) पास करना भी जरूरी कर दिया गया।

इस फैसले का मुख्य उद्देश्य पूरे देश में शिक्षकों की गुणवत्ता को एक समान बनाए रखना था, ताकि योग्य और प्रशिक्षित शिक्षक ही नियुक्त किए जा सकें। इसके बाद सभी राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे इसी नियम के अनुसार शिक्षक भर्ती प्रक्रिया अपनाएं।

2013 के पत्र में मिली बड़ी राहत

सितंबर 2013 में जारी एक आधिकारिक पत्र में इस विषय को और स्पष्ट किया गया। इस पत्र में बताया गया कि किन परिस्थितियों में टीईटी अनिवार्य है और किन मामलों में छूट दी जा सकती है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई कि यदि किसी राज्य में शिक्षक भर्ती की प्रक्रिया या विज्ञापन 23 अगस्त 2010 से पहले जारी किया गया था, तो ऐसे मामलों में टीईटी अनिवार्य नहीं होगा। इसका मतलब है कि पुराने विज्ञापन के आधार पर चयनित होने वाले अभ्यर्थियों को टीईटी से छूट मिल सकती है।

त्रिपुरा का उदाहरण समझिए

इस संदर्भ में त्रिपुरा राज्य का उदाहरण दिया गया, जहां 2002, 2006 और 2009 में शिक्षक भर्ती के विज्ञापन जारी हुए थे। इन भर्तियों के लिए टीईटी को अनिवार्य नहीं माना गया। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि पुराने नियमों के तहत शुरू हुई चयन प्रक्रिया पर नया टीईटी नियम लागू नहीं होगा।

2001 और 2012 के नियमों से भी राहत

पत्र में यह भी बताया गया कि 2010 से पहले की सभी भर्तियों को वर्ष 2001 के नियमों के आधार पर मान्यता दी जाएगी। उस समय टीईटी अनिवार्य नहीं था।

इसके अलावा 18 जून 2012 को सरकार द्वारा कुछ राज्यों को अतिरिक्त समय दिया गया था। उदाहरण के तौर पर त्रिपुरा को 31 मार्च 2015 तक की छूट दी गई थी। हालांकि इसके साथ एक शर्त भी जोड़ी गई—ऐसे शिक्षकों को नियुक्ति के बाद 2 वर्षों के भीतर आवश्यक योग्यता पूरी करनी होगी।

राज्यों की जिम्मेदारी और अंतिम निष्कर्ष

इस पूरे मामले में यह साफ किया गया है कि राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि वे नियमों के अनुसार शिक्षक भर्ती करें। साथ ही, जिन शिक्षकों को छूट के आधार पर नियुक्त किया गया है, उन्हें निर्धारित समय के भीतर अपनी योग्यता पूरी करनी होगी।

निष्कर्ष के रूप में, यह कहा जा सकता है कि टीईटी की अनिवार्यता पूरी तरह इस बात पर निर्भर करती है कि भर्ती प्रक्रिया कब शुरू हुई थी। यदि चयन प्रक्रिया 23 अगस्त 2010 से पहले शुरू हुई है, तो टीईटी जरूरी नहीं है। वहीं, इसके बाद की सभी भर्तियों में टीईटी पास करना अनिवार्य कर दिया गया है।

इस स्पष्टता के बाद अब उम्मीदवारों के बीच बना भ्रम काफी हद तक दूर हो गया है और वे अपने करियर की दिशा को बेहतर तरीके से समझ सकते हैं।

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